मन कभी नहीं भरता, जितना दो उतना ही और मांगता है
इस जिंदगी में कोई और चीज तुम्हें संतुष्ट न सकेगी. तुम्हारा पात्रा खाली का खाली रहेगा. कितना ही धन डालो इसमें खो जाएगा. कितना ही पद डालो इसमें खो जायेगा.

फकीर ने अपना पात्र उसके सामने कर दिया सम्राट ने कहा क्या चाहते हो? फकीर ने कहा कुछ भी दे दो “शर्त एक हैं” मेरा पात्र पूरा भर जाएं. मैं थक गया हूं, यह पात्र भरता ही नहीं. सम्राट हंसने लगा और कहा तुम पागल मालुम होते हो. पागल न होते तो, फकीर ही क्यों होते, यह छोटा सा पात्र भरता नहीं? फिर सम्राट ने अपने वजीर से कहा लाओ स्वर्ण-अशर्फियों से भर दो, इस फकीर का मुंह सदा के लिए बंद कर दो. फ़क़ीर ने कहा में फिर याद दिला दू की भरने की कोशिश अगर आप करते हैं तो यह शर्त है की जब तक भरेगा नहीं पात्र में हटूंगा नहीं .
सम्राट ने कहा तू घबरा मत पागल भर देंगे. सोने से भर देंगे, हीरे-जवाहरात से भर देंगे. लेकिन जल्द ही सम्राट को अपनी भूल समझ में आ गई अशर्फियां डाली गई और खो गई . हिरे डालें गयें और खो गयें . लेकिन सम्राट भी जिद्दी था और फिर फ़क़ीर से हार माने यह भी तो जंचता न था. सारी राजधानी में खबर पहुंच गई हजारों लोग इकट्ठे हो गए. सम्राट अपना खजाना उलीचता गया. उसने कहा आज दांव पर लग जाना हैं सब डूबा दूंगा मगर उसका पात्र भरूंगा. शाम हो गई. सूरज ढलने लगा. सम्राट के कभी खाली न होने वाले खजाने खाली हो गए, लेकिन पात्र नहीं भरा सो नहीं भरा. वह गिर पड़ा फकीर के चरणों में और कहा मुझे माफ़ कर दो. मेरी अकड़ मिटा दी, अच्छा किया. मैं तो सोचता था यह अक्षत खजाना है, लेकिन यह तेरे छोटे से पात्र को भी न भर पाया. बस अब एक ही प्रार्थना है में तो हार गया मुझे क्षमा कर दो.
मैंने व्यर्थ ही तुझे आश्वासन दिया था भरने का. मग़र जाने से पहले एक छोटी सी बात मुझे बताते जाओ. दिन भर यही प्रश्न मेरे मन में उठेगा. यह पात्र क्या है, किस जादू से बनाया है. फकीर हंसने लगा उसने कहा किसी जादू से नहीं इसे आदमी के ह्रदय से बनाया गया है. ना आदमी का ह्रदय भरता है ना यह पात्र भरता है.
इस जिंदगी में कोई और चीज तुम्हें संतुष्ट न सकेगी. तुम्हारा पात्रा खाली का खाली रहेगा. कितना ही धन डालो इसमें खो जाएगा. कितना ही पद डालो इसमें खो जायेगा, पात्र खाली का खाली ही रहेगा. तुम भरोगे नहीं. भरता तो आदमी तो केवल परमात्मा से हैं. क्योंकि अनंत है हमारी प्यास, अनन्त है हमारा परमात्मा तो अनंत को अनंत ही भर सकेगा.
from Latest News कल्चर News18 हिंदी https://ift.tt/2K2r0y6सम्राट ने कहा तू घबरा मत पागल भर देंगे. सोने से भर देंगे, हीरे-जवाहरात से भर देंगे. लेकिन जल्द ही सम्राट को अपनी भूल समझ में आ गई अशर्फियां डाली गई और खो गई . हिरे डालें गयें और खो गयें . लेकिन सम्राट भी जिद्दी था और फिर फ़क़ीर से हार माने यह भी तो जंचता न था. सारी राजधानी में खबर पहुंच गई हजारों लोग इकट्ठे हो गए. सम्राट अपना खजाना उलीचता गया. उसने कहा आज दांव पर लग जाना हैं सब डूबा दूंगा मगर उसका पात्र भरूंगा. शाम हो गई. सूरज ढलने लगा. सम्राट के कभी खाली न होने वाले खजाने खाली हो गए, लेकिन पात्र नहीं भरा सो नहीं भरा. वह गिर पड़ा फकीर के चरणों में और कहा मुझे माफ़ कर दो. मेरी अकड़ मिटा दी, अच्छा किया. मैं तो सोचता था यह अक्षत खजाना है, लेकिन यह तेरे छोटे से पात्र को भी न भर पाया. बस अब एक ही प्रार्थना है में तो हार गया मुझे क्षमा कर दो.
मैंने व्यर्थ ही तुझे आश्वासन दिया था भरने का. मग़र जाने से पहले एक छोटी सी बात मुझे बताते जाओ. दिन भर यही प्रश्न मेरे मन में उठेगा. यह पात्र क्या है, किस जादू से बनाया है. फकीर हंसने लगा उसने कहा किसी जादू से नहीं इसे आदमी के ह्रदय से बनाया गया है. ना आदमी का ह्रदय भरता है ना यह पात्र भरता है.
इस जिंदगी में कोई और चीज तुम्हें संतुष्ट न सकेगी. तुम्हारा पात्रा खाली का खाली रहेगा. कितना ही धन डालो इसमें खो जाएगा. कितना ही पद डालो इसमें खो जायेगा, पात्र खाली का खाली ही रहेगा. तुम भरोगे नहीं. भरता तो आदमी तो केवल परमात्मा से हैं. क्योंकि अनंत है हमारी प्यास, अनन्त है हमारा परमात्मा तो अनंत को अनंत ही भर सकेगा.

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