अभी थोड़ी देर पहले अपनी जिस गरीबी और लाचारी पर मैं शर्मिंदा थी, फातिमा को देखकर वो जाती रही. मुझे अपना शहर याद आया, अपना घर, अपना सच और अपने वो सारे सपने, जिन्हें लेकर मैं इस महानगर में आई थी. जीवन में कुछ बनने, अपने पैरों पर खड़े होने. मुंह पोतकर डेट पर जाने के लिए नहींfrom Latest News लाइफ़ News18 हिंदी https://ift.tt/2NIlU88

No comments:
Post a Comment